शहर रात भर जागता है,
सड़कें चमकती हैं,
इमारतें ऊँची दिखाई देती हैं,
लेकिन आदमी भीतर से
थका हुआ होता है।
सड़कें चमकती हैं,
इमारतें ऊँची दिखाई देती हैं,
लेकिन आदमी भीतर से
थका हुआ होता है।
लोग हजारों चेहरों के बीच रहते हैं,
फिर भी
अपना दर्द कहने वाला
कोई नहीं मिलता।
हर कोई
समय के पीछे भाग रहा है,
पर किसी के पास
अपने लिए समय नहीं है।
शहर ने
सुविधाएँ बहुत दीं,
लेकिन चैन
धीरे-धीरे छीन लिया।
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