इंसानियत/ जसराज बिश्नोई

मंदिरों में भीड़ है,
मस्जिदों में दुआएँ हैं,
गुरुद्वारों में सेवा है,
चर्चों में प्रार्थना है।

लेकिन सड़क पर गिरा इंसान
आज भी
मदद का इंतज़ार करता है।

हमने धर्म बहुत सीख लिए,
लेकिन इंसान बनना
अब भी बाकी है।

अगर किसी रोते हुए चेहरे को
हँसी दे सको,
किसी भूखे को
रोटी दे सको,
तो वही
सबसे बड़ी पूजा है।

धरती को आज
महान लोगों की नहीं,
अच्छे इंसानों की ज़रूरत है।

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