बहुत तेज़ भाग रहा है,
लेकिन किसी को नहीं पता
कि मंज़िल कहाँ है।
हर हाथ में मोबाइल है,
हर चेहरे पर मुस्कान की फोटो है,
फिर भी
अंदर से लोग
टूटे हुए दिखाई देते हैं।
रिश्ते अब
ज़रूरत के अनुसार बदलते हैं,
और सच्चाई
अक्सर मज़ाक बन जाती है।
हमने बड़े शहर बना लिए,
लेकिन छोटा दिल
आज भी नहीं बदल पाए।
समाज तब सुंदर होगा
जब आदमी
दूसरे की तकलीफ़ को
अपनी तकलीफ़ समझेगा।
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