किसान
धरती पर पसीना बोता है,
तभी शहरों में
रोटियाँ पकती हैं।
लेकिन सबसे दुख की बात यह है
कि जो आदमी
सबका पेट भरता है,
वही कई बार
खुद भूखा सो जाता है।
बारिश अगर ज़्यादा हो जाए
तो फसल डूब जाती है,
कम हो जाए
तो खेत सूख जाते हैं।
कर्ज़ का बोझ
उसकी पीठ पर
धीरे-धीरे पहाड़ बन जाता है।
फिर भी किसान
हर सुबह खेत जाता है,
क्योंकि उसे उम्मीद होती है
कि अगली फसल
शायद जिंदगी बदल दे।
0 Comments